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*वृद्धाश्रम नाटक के मंचन का मार्मिक दृश्य देख भर आई दर्शकों की आंखें

*वृद्धाश्रम नाटक के मंचन का मार्मिक दृश्य देख भर आई दर्शकों की आंखें, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा पूरा ऑडिटोरियम*

कानपुर नगर।

सी बी ए गुरुकुल स्कूल के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर एक मार्मिक, भावपूर्ण और हृदय स्पर्शी नाटक ‘वृद्धाश्रम’ का मंचन किया गया।

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नाटक का शुभारंभ सर्वप्रथम माँ सरस्वती की वंदना के साथ शुरू हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में अकबरपुर महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक डॉ नरेंद्र द्विवेदी और वर्तमान मंत्री अनिल शुक्ला जी द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया।

‘वृद्धाश्रम’ पर आधारित नाटक की कहानी आमतौर पर आधुनिक जीवनशैली में बदलती पारिवारिक मूल्यों, संवेदनशीलता और पीढ़ियों के बीच के टकराव (जनरेशन गैप) को दर्शाती है। यह नाटक दर्शकों को गहराई से भावुक करते हुए समाज के लिए एक गहरा संदेश देती हैं।

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वृद्ध माँ (सरला देवी) अपने बेटे और परिवार के लिए चिंतित रहती है। बेटा अशोक आधुनिक सोच वाला है, लेकिन समय के अभाव में अपने माता-पिता को बोझ समझता लगता है। बहू (प्रीति) कामकाजी महिला, जिसे सास-ससुर की आदतें खटकती रहती हैं।

 

वृद्ध माँ को लेकर पति-पत्नी की रोज-रोज की नोक-झोंक से एक दिन बेटा अपनी माँ को वृद्धाश्रम में चार-पांच दिन बाद ले जाने का बहाना करके छोड़ आता है। वृद्ध माँ आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग लोगों से कहती है कि मेरा बेटा चार-पाँच दिन के लिए मुझे यहां छोड़ गया है फिर आकर ले जाएगा। बुजुर्ग उस मां की बात को सुनकर हंसते हैं और भावुक हो जाते हैं। चार-पांच दिन से भी ज्यादा बीत जाने पर जब बेटा अपनी माँ को लेने नहीं आता तो माँ की हालत अचानक खराब हो जाती है और वह खाँसते हुये जमीन पर गिर जाती कुछ देर बाद उसकी सांसें थम जाती है। और वह हमेशा-हमेशा के लिये इस दुनिया से अलविदा हो जाती है। इस मार्मिक दृश्य को देख नाटक में एक बुजुर्ग वर्मा जी का अहम किरदार निभा रहे कलाकार विनीत सिन्हा भावपूर्ण कटाक्ष वार करते हुये अपने संवाद के द्वारा कहते हैं कि जिंदगी भर बेटों पर खुशियाँ लुटाने वाले माँ-बाप को किस जुर्म में आंसुओं और तन्हाई की सजा सुना दी जाती है…

नहीं चाहिये ऐसी औलाद नहीं चाहिये, कह दो सरला देवी के बेटे से अगर हो गये हों उनके चार-पांच दिन तो ले जाये, ले जाये अपनी माँ की लाश को और उनके रखे हुये समान को ले जाये – ले जाये… इसी बीच तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा ऑडिटोरियम गूंज उठता है।

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का संवाद बहुत ही मार्मिक है। इस नाटक को देख दर्शक भावुक हो जाते हैं। वृद्धाश्रम एक संवेदनशील, मार्मिक और भावुक प्रस्तुति है, जो परिवारों में बुजुर्गों के महत्व और उनके अकेलेपन की कहानी को दर्शाती है।

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का मंचन दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए। इसमें बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने की घटना का शानदार मंचन किया गया।

वृद्धाश्रम नाटक का मंचन और मार्मिक दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें भर आतीi है।

नाटक का उद्देश्य समाज को यह संदेश देता कि माता-पिता ‘बोझ’ नहीं बल्कि परिवार की नींव होते हैं। हमें उनकी सेवा और सम्मान उसी तरह करना चाहिए, जैसे बचपन में उन्होंने हमारी उंगली पकड़कर हमें चलना सिखाया था।

*करैक्टर आर्टिस्ट*

पापा- राज किशोर

माँ सराला देवी – विजय लक्ष्मी मिश्रा,

छोटा बेटा- वंश

बेटा अशोक- सुनील पाण्डेय,

बहु- रौशनी मैम,

मैनेजर- देवराज बासु,

संध्या- कशिश मैम,

सीमा- सोनी मैम,

वंदना- शिखा मैम,

राकेश- साहिल,

शर्मा जी- श्याम अकेला,

गुप्ता जी- गोविन्द सिंह,

और वर्मा जी का अहम किरदार कलाकार विनीत सिन्हा ने बखूबी निभाया। जिससे कि दर्शक तालियां बजाने को मजबूर हो गये।

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंग कर्मी संजय शर्मा ने किया।

मेकअप एंड एंकरिंग बॉबी खान, म्यूजिक मंजू बासु (प्रिंसिपल गुरुकुल स्कूल),

प्लेबैक सिंगर्स एन्ड ट्रैक साउंड्स अलका, बॉबी, गोविंद जी ने किया

कैमरा मैन रौनक रहें। स्क्रीन ऑन एन्ड ऑफ शिवम् और शिवांश।

प्रोग्राम के आयोजक सीबीए गुरुकुल स्कूल की प्रिंसिपल अर्चना पाण्डेय और प्रबंधक डॉ ए सी पाण्डेय ने आये हुये अतिथियों एवं अभिवावकों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

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